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Bhajan Potli
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तेरी वीणा की बन जाऊं तान
सासू जी तेरी एक न मानूंगी कुम्भ मेला को जाऊंगी
प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे जहां गंगा मैया जहां यमुना मैया, जहां गंगा यमुना और सरस्वती मैया त्रिवेणी की धार बहे धीरे-धीरे,
महाकुंभ में डुबकी लगा महादेव जी मिल जाएंगे
मेरी सासू पूछे बात हो बात क्या करन गई थी सत्संग में
स्वर साज सजाते हो मां वीणा बजाते हो
मेरा छोटा सा परिवार हरि आ जाओ एक बार
मेरी इस ज़माने में हस्ती न होती, अगर तुम न होते
गया जो गया उसको जाने दीजियेगा, नए साल में कुछ तो नया कीजियेगा।।
नए साल में कुछ तो नया कीजियेगा
हमें रखना सदा खुशहाल
मेरे दाता मेरा मान न तू तोड़ी लोकी मैनू तेरा आखदे
प्रभात फेरी आई होई ए
किस-किस को नाच नचाए गई रे माया की चिडिया
तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥
मां मांवा हुंदीयां ने🌹मांमां ठंडियाँ छामा हुंदीयां ने
अमृत वेले बोले पपीहा अमृत वेले बोले
एक दिन रोओगे चीखे पुकार के, माता पिता की अपने म ूर्ति निहार के,
कदे ना मुकने कम्म वे चल सत्संग चलिये सत्संग चलिये, द्वारा ओदा मलिये
हे श्री हरि नारायण सबके दुख दूर करो
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