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कृष्ण भजन

आ जाओ अब तो मोहन,
सोखी नहीं लगनी साँवरिये नाल यारी
थाम लो मैं बिखर जाऊंगा, मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।
क्यो आके रो रहा है मोहन की गली में हर दर्द की दवा है मोहन की गली में।।
बडा प्यारा लगदा माँ बँसुरी वाला
मै मस्ती दे विच नचा नचावा नंदलाल नू
दुनिया जलती है जलने दो खाओ पी ओ ऐश करो,भगवान दा भजन करो .
नैनन में श्याम समाए गयो मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो
आ गए तेरे दीवाने ज़रा पर्दा हटाइए
नी मै गल विच पाई लई गानी शाम दी
ओ मैं तो चली वृंदावन राणा ओ मेरे सोए हुए भाग जगे, राणाजी मेरा, महलो में दिल ना लगे
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हें मना लेंगे,
मेनु देयो दर्शन मेरे श्याम नाव मेरी गोते खांदी ए
मन मोहन की बन के दीवानी मैं छम-२ नचदी फिरा
हारा वाले श्याम वे मेरी तेरे हाथ डोर
सुन यशोदा माॅ तेरे लाल नू फडया ऐ
डाली उते डाली उते फुल खिडया मैनू याद शाम दी आई
रूस ना जावीं मोहन मेरे, जीवन मेरा सहारे तेरे
तैनू वेख मेरा दिल खिल जांदा चाहे जिंना मरजी उदास होवे,
मीरा दे घुंघरू छन वजदे कोई सुने नसीबा वाला
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