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गुरुदेव भजन

मैनु इतना प्यारा गुरु मिला, गुरु दा सोणा दरबार मिला।
मैनु इतना प्यारा गुरु मिला, गुरु दा सोणा दरबार मिला।
गुरु रहमत से तर जायेगा पार भव से उतर जायेगा
जे 'सुख पाना ए चल संता दे कोल
ओ मैं सत्संग दे बिच चलीया, माँ मेनू रोकी ना
लेलो सत्संग मिठिया गनेरिया मेरे सतगुरु ने लाईया ने टेरिया
तकदया तकदया सोणया तैनू मैनू चढया ऐ खुमार ओय मै सदके जाॅवा
दुगी दुगी नदिया पुराना पेय वेहदा किसे न फडी मेरी बाह,
आज आई घड़ी खुशियां वाली आई संगत भागां वाली
बधाईयाँ होन बधाईयाँ बधाईयाँ जी बधाईयाँ
मेरे सतगुरु का श्रिंगार,गल्ल फूलों के हार,
गुरु ने ऐसा प्यार किया है, अब ना कोई चाह बाकी।
जन्मदिन गुरू आ दा आया खुशियाँ नाल के अज मैनू नच लेण दे
मैं बलिहारी सतगुरु तेरे, गुरु जी आये साडे वेडे।
मै तेरी पतंग दातया तेरे हथ डोर
सतगुरु तुम्हारे प्यार ने हमें जीना सीखा दिया
ना दौलत ना शोहरत बड़ी चीज है
गुरु बिन ज्ञान गंगा बिन तीर्थ, एकादशी बिना व्रत कहाँ है ?
झूठी माया से बंदिया है प्रीत तेरी,
राम सोणे श्याम सोणे ओ मेरे सतगुरु प्यारे बड़े सोणे
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