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Bhajan Potli
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तुलसी भजन
Tulsi Bhajan
तुलसी का पूजन पावन है जो घर-घर में लहराती है
तुलसी की पात्ती कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पे रीझे
तुलसा मईया लहराऐ बडी शान से मोहे पति मिलेहैं शालिगराम से
मेरा मन डोले मेरा तन डोले मोहे माला दिला ला तुलसी की
मेरी सूख गई तुलसा पाणी के बिना, पाणी के बिना, राधा रानी के बिना,
अंगना में तुलसी लगाऊंगी हरी दर्शन मैं पाऊंगी
तुलसा तेरी डाली पर श्याम बसते
बूटा तुलसी दा वे डे विच लाई रख दी बूटा तुलसी दा
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