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विविध भजन

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कदे ना मुकने कम्म वे चल सत्संग चलिये सत्संग चलिये, द्वारा ओदा मलिये
हे श्री हरि नारायण सबके दुख दूर करो
गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश
जिन्दगी एक किराए का घर है
जीवन का भरोसा नही कब मौत आ जायेगी
दो गज कफ़न का टुकड़ा, तेरा लिबाज़ होगा,
आराम के क्या क्या साथी थे, जब वक्त पडा तब कोई नहीं।
कुछ पल की जिंदगानी एक रोज सबको जाना।
जब तेरी डोली निकाली जाएगी,
भाव बिन मिले नही भगवान
ना राम नाम लीनो तेने भरी जवानी में, तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में ,
मेरे दाता के दरबार में, सब लोगो का खाता,
सो तीरथ का पुण्य मिलेगा मिलेगा हर दुःख से आराम,
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ।
धीरे-धीरे मोड़ तू इस मन को इस मन को तू इस मन को
मेरे पिता मेरे भगवान,मेरी दुनिया कर विरान, कहां तुम चले गये।
मुझे उंगली पकड़ के तूने चलना सिखाया, मेरे बाबा
तुम्बा जिन्दगी दा, सदा नहीं वजदे रहना
बात समझ में आई अब हमारी, झूठी है सारी दुनियादा
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है
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