अपनी बांह पकड़ ली प्यारी अपनी राधा रानी ने
Apni Bah pakad Li pyari apni Radha Rani ne
अपनी बांह पकड़ ली प्यारी अपनी राधा रानी ने अपनी बांह पकड़ ली, क्या चिंता जो मोड़ लिया मुख हमसे दुनियादारी ने, अपनी बांह पकड़ ली प्यारी अपनी राधा रानी ने अपनी बांह पकड़ ली
इसकी उसकी सुनते सुनते जीवन सारा बीत गया, इक दिन अपने जिद्दी मन से मैं भी आखिर जीत गया, वृंदावन की राह पकड़ ली भटक रहे संसारी में, अपनी बांह पकड़ ली
चंचल मन की चंचलता से जब से है छुटकारा मिला, अंतर मन के बागीचे का सारा मौसम बदल गया, भक्ति भाव की महक भर गई मनवा की फुलवारी में, अपनी बांह पकड़ ली
कहीं भी आऊं कहीं भी जाऊं राधा राधा नाम रहे,काम करूं कोई भी ऐसा चिंतन में ब्रज धाम रहे, रंग चढ़ाया है कुछ ऐसा मेरी भानु दुलारी ने, अपनी बांह पकड़ ली
अपनी बांह पकड़ ली प्यारी अपनी राधा रानी ने अपनी बाह पकड़ ली, क्या चिंता जो मोड़ लिया मुख हमसे दुनियादारी ने, अपनी बांह पकड़ ली प्यारी अपनी राधा रानी ने अपनी बांह पकड़ ली
#bhajan potli
श्रेणी:
राधा रानी भजन
स्वर:
Sangeeta Kapur
