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घनश्याम मदन मोहन
घनश्याम मदन मोहन
घनश्याम मदन मोहन इतनी सी दया करना
घनश्याम मदन मोहन इतनी सी दया करना
मन तेरे चरणों में रहे तू मन में रहा करना
इतनी बड़ी दुनिया में कोई भी नहीं अपना
गर तुम ना बने अपने तो किसको कहूं अपना।
है चाह मेरी यही मेरे ही रहा करना
मन तेरे चरणों में रहे तू मन में रहा करना
बेदर्द यह दुनियां है खुदगर्ज जमाना है
सुनने को तो सुनती थी पर अब यह जाना है
उलझु ना जमाने में बस ऐसी कृपा करना
मां तेरे चरणों में रहे तू मन में रहा करना
घनश्याम मदन मोहन इतनी सी दया करना
जो जग के सताए हैं तू सबका सहारा है
दुखियों का ठिकाना जहां बस तेरा द्वारा है
मैं भी तेरी शरण पड़ी मुझसे भी वफा करना।
मन तेरे चरणों में रहे तू मन में रहा करना
घनश्याम मदन मोहन इतनी सी दया करना।।
श्रेणी:
कृष्ण भजन
स्वर:
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