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मेरे कान्हा में वो जादू है बिन डोर खींचा आता हूँ,
Mere kanha mai wo jadu hai
मेरे कान्हा में वो जादू है बिन डोर खींचा आता
हूँ,जाना होता है और कहीं तेरी और खींचा आता
हूँ,तेरे चेहरे में वो जादू है बिन डोर खींचा आता
हूँ जाना होता है और कही तेरी और खींचा आता
हूँ मेरे कान्हा में वो जादू है.........
जब से तुझको देखा है देख कर खुदा को माना है
मान कर दिल ये कहता है मेरी खुशियों का तुम ही
खजाना,दे दे प्यार की मंजूरी करदे कमी मेरी पूरी
तुझसे थोडी सी दूरी मुझको कर देती दिवाना,चल
पडते है तेरी और कदम,मैं रोक नही पाता हूँ,मेरे
कान्हा में वो जादू है..........
तेरी हिरनी जैसी आँखे आँखो में लाखों बातें,मन में
जीने की प्यास जगाये,तू जो एक नजर डाले जी उठे
मरने वाले,लब तेरे अमृत के प्याले दिल में जीने की
आस बढाये,पाना तुझको मुशिकल ही सही पर,पाने
को मचल जाता हूँ,मेरे कान्हा में वो जादू है.........
श्रेणी:
कृष्ण भजन
स्वर:
Sangeeta kapur ji
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