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मै पगली वृंदावन वन जाना आना नही दुबारा

Main pagali vrindavan jana aana nahi dobara

जिस दिन मोहन पाती भेजी या कोई किया इशारा
मैं पगली वृंदावन जाना आना नहीं दुबारा
मैं ओथे बस जाना नी, चाहे लोग बोलिया बोल

मै वृंदावन जाना नहीं चाहे लोग बोलिया बोले
चाहे लोग बोलिया बोले चाहे लोग बोलिया बोले
मै ता बाज ना आना नी चाहे लोग बोलिया बोले

रोक रही मुझे दुनिया सारी रोक रहे घरवाले
प्रीत कदे वी कैद ना होनदी लख लगा लो ताले
ताला तोड़ के जाना नी चाहे लोग बोलिया बोले

प्रीतम मेरे राधा वल्लभ मै इनकी दीवानी
हो जाए जो होना है हुन मै करनी ऐ मनमानी
जा चरणी लग जाना नी चाहे लोग बोलिया बोले

गिरधर दी दीवानी मीरा गिरधर गिरधर बोले
महला दे सुख छोड़ छाड़ के वृंदावन विच डोले
मैं ओईयो सुख पाना नी, चाहे लोग बोलिया बोले

ब्रज मंडल मेरा धाम रंगीला मनमोहन ब्रज वासी
जल बिन मछली जयू तड़पे जयू तड़पे हरिदासी
जा के दर्शन पानानी चाहे लोग बोलियां बोली

श्रेणी:

कृष्ण भजन

स्वर:

Anita sobti

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