मोहे नदी बनईयो भोले अपने कैलाश को
Mohe Nandi banaiyo Bhole Apne Kailash ko
मोहे नंदी बनैयो भोले अपने कैलाश को
मैं नाच नाच कूद कूद तुमको रीझाऊंगी
मोहे नाग बनैयो भोले अपने गले को
मैं शिव के गले का हार कहलाऊंगी,,
शंकर,,,, भोले,,,, शंभू,,,,,, भोले,,,,,,
मोहे भिखारी बनैयो तो बनैयो काशी को
मैं मांग मांग टूक काशी वासियों से खाऊंगी
मोहे गायक बनइयो तो बनैयो उज्जैन को
मैं आठो याम भोले भोले नाम गुनगुनाऊंगी
शंकर,,,, भोले,,,, शंभू,,,,,, भोले,,,,,,
मोहे त्रिपुंड बनइयो भोले अपने मस्तक को
मैं तीनों लोकों के सर का ताज बन जाऊंगी
नीलकंठ बनैयो भोले अपने गले को
मैं सारी दुनिया का विष पी जाऊंगी,,,,,
शंकर,,,, भोले,,,, शंभू,,,,,, भोले,,,,,,
मोहे डमरू बनइयो भोले अपने हाथन को
मैं दुनिया में सुर संगीत सुनाऊंगी
मोहे त्रिशूल बनइयो भोले अपने हाथन को
मैं असुर जनों का संघार कर पाऊंगी,,,,,
शंकर,,,, भोले,,,, शंभू,,,,,, भोले,,,,,,
मोहे पेड़ बनइयो तो बनैयो बेलपत्र को
मैं शिव के चरणों में अर्पण हो जाऊंगी
मोहे भस्म बनैयो तो बनैयो श्मशान की
मैं भस्म आरती में शामिल हो पाऊंगी
शंकर,,,, भोले,,,, शंभू,,,,,, भोले,,,,,,
# bhajan potli
श्रेणी:
शिव जी भजन
स्वर:
sangeeta kapur
