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कृष्ण भजन

नी मैं रुसिया श्याम मना लया,श्याम सुन्दर नू अपना बना लया
गवाडने चल बिनदरावन चलिऐ
मेरे श्याम का दर्शन पाना है तो बोलो राधे राधे
बांके बिहारी तुझे देख के मेरे नैना उलझ गये
मोर मुकुट रंग कालया ओ मन मोह लया कुण्डलया वालया ओ श्यामा
घर शाम दी गली दे विच पाल्या लोकी कैन दे होई कमली
ढोलकी वजदी विच सत्संग दे किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे
मेरे घर विच आ गया नी मेरा हारावाला
मेरी मटकी नू हाथ ना लाईं श्यामा
वै काले रंग वालया वारी तैथो जावा बलिहारी तैथो जावा……
नंद यशोदा की आँख का तारा बिहारी मेरा रंग रसिया
वृंदावन में राधे जी का नाम जपना हां नाम जपना तुझे श्याम मिल जाएंगे।
सुन यशोदा माॅ तेरे लाल नू फडया ऐ शाम मुरारी ता सखिया नाल लडया ऐ
ना लाई लाई-२ श्यामा मेरी मटकी नू हथ ना लाई
मन चल वृन्दावन चल वे मना,एथे ओ नजारा नहीं मिलना
सांवरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है, चलो सत्संग में चले, हमें हरि गुण गाना है।
शाम मेरा नचदा ए मोर बनके मोर बनके मैंनू नचना ना आवे
वे वृन्दावन वालया सानू चढ़ गई तेरी मस्ती
तेरे मोटे मोटे नैन तेरे बडे बडे नैन शामा लुट लैनदे चैन
डाली उते डाली उते फुल खिडया मैनू याद शाम दी आई
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