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नवरात्रि भजन

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साडी झोपडी च माये फेरा पा भावे थोडी देर लई आ
नी मैं कमली मईया दी कमली
चमक रही रे मैया की चुनरिया चमक रही रे देखन को नजरिया तरस रही रे
मईया जी नच मोरे अंगनेआज नच मोरे अंग
चुनरी जयपुर से मॅगवा दूगी मेरी मईया शेरावाली
कंजका नू वडदी आई मेरी माता शेर चढे चढ आई
मेरे नाल अम्मिये क्यों रूस गई ये किनू दिल दे मै हाल सुनामा
खोल हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दे
केडे बहाने आमा दातिए केडे बहाने आवा
तेरे मंदिरा च वजदे ढोल मां शेरावाली आ मंदिरा दे कोल
मेरी माँ दा द्वारा वाह भई वाह शेरा वाली दा नज़ारा वाह भई वाह
कदे कट दैनदी ऐ कदे वद दैनदी ऐ जदो
ओढ के चुनरिया लाल मैं नाचूँ तेरे अंगना मे
तुम सजती रहो हम सजाते रहे माँ सजाने में आनंद आता है
मैं नहीं थकती माँ, जयकारा तेरा बोल के|
जे तू दर उते अपने बुलावे चढावा तैनू लाल चुनिया माॅ
आज मईया का किर्तन हमारे अंगना
नाचो गाओ ख़ुशी मनाओ झूमो रे सब आज की दादी आई है
बल्ले बल्ले पहाड़ों में कमाल हो गया
मुझे ले चलिए हनुमान, मैया के जगराते में
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