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Bhajan Potli
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शिव जी भजन
Shiv ji bhajan
कैलाश पर्वत पर चढ़ गयो रे
भोले बाबा वेद बने सरकारी
चलो चलो ससुराल ओ भोले नाथ
भोले बाबा से गौरा यूं बोली आज थोड़ी सी भांग में पियूंगी
मेरे भोले दे दरबार रौनका लगिया
भोले दे संग वयाह करवा के मौजा ही मौजा लूटी
देखो अमरनाथ विच जाके भोला बै गया बर्फ जमा के
भोले बाबा को मना कर देख दुःख सारे मिट जाएंगे
तेरा डमरू सोना वजदा ओ भोलया
आओ मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगाओ
तेरा देखेया परोना नी गोरा
फिरनिया गोकुल दिया गलियां
भोले ने धोटी भांग जुल्म कर डारो
कण कण में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है
भोले नाथ तुम्हारे मंदिर में ये अजब नजारा देखा है
मै नित नित सगन मनावा व्याह मेरी गौरा दा
इक तारा वजदा नी सहेलियों गोविंद गोविंद कैंहना
भोले मैं ना चलूंगी तेरे साथ गंगा मैया यूं शिव से कहने लगी
यार दी यारी ते यारा नू है मान
दर उते आ गए ने भगत भोलेया
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