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शिव जी भजन

Shiv bhajan

मोहे नदी बनईयो भोले अपने कैलाश को
भोले बाबा ने किया श्रृंगार गौरा के घर जाना है
भोलेनाथ की दीवानी गोरा रानी लागे
फूलों और कलियों में बहार आ गई देख गोरा तेरी बारात आ गई
जटा खोल के डमरू बजा दे भोले
मथे उते चंद चमकान वालेया शिव भोलेया
नंदी पे होके सवार भोला चला दूल्हा बनके
आज सखी ऐसे मनईयो भोलेनाथ को
कैलाश पर्वत पर चढ़ गयो रे
भोले बाबा वेद बने सरकारी
चलो चलो ससुराल ओ भोले नाथ
भोले बाबा से गौरा यूं बोली आज थोड़ी सी भांग में पियूंगी
मेरे भोले दे दरबार रौनका लगिया
भोले दे संग वयाह करवा के मौजा ही मौजा लूटी
देखो अमरनाथ विच जाके भोला बै गया बर्फ जमा के
भोले बाबा को मना कर देख दुःख सारे मिट जाएंगे
तेरा डमरू सोना वजदा ओ भोलया
आओ मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगाओ
तेरा देखेया परोना नी गोरा
फिरनिया गोकुल दिया गलियां
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