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Bhajan Potli
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कृष्ण भजन
Krishan bhajan
धनेया तू कीवे मना मना लैया ठाकुर मस्त मलंग
हारावालेया वे इक झलक दिखा जा
मेनू राधा वाली ओढ़नी लिया दे तेरा केड़ा मुल लगदा
सोना जी सोना मेरा शाम नी मै वारी जावा
कृष्ण कन्हाईया मुरली बजैया हो गई आधी रात
गोरा गोरा मुखड़ा गहरी गहरी अखियां
पाके घुंघरु नचा मैं दर तेरे बंसरी बजा न वालेया
सखी री मैं तो काले रंग पे वारी
लड्डू जैसा है लड्डू गोपाल
तुम गवालिन गवालिन क्या करते हो शामा
श्यामा होली खेलन आईयां तेरियां सालिया वे
मैया लाला को समझा ले
अंगना चे मैनचदी बागा चे नचते मोर
पूछ रही राधा बताओ गिरधारी मैं लगु प्यारी या बांसुरिया प् यारी
सखी री मैं तो काले रंग पे वारी
मेरे लहंगे नु घुंघरू लवाईदे श्यामा होली है
सोने हारावाले दे नाल देखो किदी गल बनदी
प्रेम नगर की प्रेम गली मे राधा बोली शाम से
बल्ले बल्ले के शाम दा व्याह आ गया
मेरे बाँके बिहारी लाल, तू इतना ना करियो श्रंगार, नजर तोहे लग जाएगी तेरी मंद मंद मुस्कान ओ कान्हा नटखट नन्द गोपाल, नजर तोहे लग जायेगी
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