top of page

कृष्ण भजन

कन्हैया मेरे हाथों से छूट गयो रे,
काला काला काला नी सहेलियो काले ने बहुत सताया नी सहेलियो
वृन्दावन दा चोर साडे वेडे आ वडया
मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने
हारा वाले नू मना ले एक बार मौज लग जाएगी तेरी
मुझे वृन्दावन धाम बसा ले रसिया
मन राधे शाम राधे शाम गालै नाम जपने की आदत बनालै
रब्बा कर बदलाँ दी छां कि आज मेरे शाम ने आना,
मेरे महबूब प्यारे कन्हैया किस जगह तेरा जलवा नही है।।
भूखे है तेरे प्यार के हमें भी दीदार दे,
मै जिथे जिथे जाॅवा गोपाल मेरे नाल
अखियां अखियां अखियां, नि मैं बढ़िया, सांब के राखियां
मेरे जर जर हैं पाँव, संभालो प्रभु
तेरा कन्हैया माॅ करता कमाल
नी ओ तेरा की लगदा, काली कंबली बाला
मैं ता श्याम मनाना नी चाहे लोग बोलिया बोले
तेरे लखां ने ठिकाने तैनू लबा किथे-२
हो श्यामा लगया कलेजे तीर सब तैनु काला कैंदे ने-
मेरा शाम मेरे घर आवे आके मिठडे बोल सुनाने
मेरा कस के पकड़ लो हाथ छुड़ाऊं तो छुड़ाया नहीं जाए ।
bottom of page