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कृष्ण भजन

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ हो गई मेरी बल्ले बल्ले
कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे
वे तेरे जेहा सोहना होर नहियो होना
मेरे बांके बिहारी ने बुलाया चली मैं वृन्दावन को चली
जबसे मिला तू संवारे किस्मत सवर गई
जब कोई तकलीफ सताए जब जब मन घबराता है
श्याम सपनो में आता क्यूँ नहीं
वृन्दावन के बांके बिहारी, हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मैं तेरी कठपुतली, श्याम मैं तेरी कठपुतली
मैं चिठिया लिख लिख हारी
दिल दिया मैंने उस सांवरे को
कान्हा खो गया दिल मेरा तेरे वृंदावन मे
बांके बिहारी तेरे नाल वे मैं ता ला लईया अखिया,
मेरा कन्हिया मुझसे प्यार करे
नी मैं आपे प्रीता ला लाईया सावरे दे नाल
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
प्रेम दी जंजीर नाल सावरे नु बनिये
नाम है तेरा तरण हरा कब तेरा दर्शन होगा
छुपा कहाँ आजा छलियाँ मुरली वाले आजा तेरी याद सताये
उलझी कान्हा से नजरिया कैसे सुलझे
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