top of page

कृष्ण भजन

मुरली जो ली तूने हाथों में सारी सखियां नाचने लगी कनहियां तेरे साथ में
बिहारी घर मेरा बृज में बसा दोगे तो क्या होगा
पिया के रंग, रंग दी ओढनी
बिहारी तेरी यारी पे बलिहारी रे बलिहारी
पट खोल दे मुरली वाले जरा हम दिल की सुनाने आये है
आजा मोहना  मै  तेरे  वारी  वारी  जानी ऑ
आई शरद पूनम की रात मधुबन में आज रचो महारास
मैं तो कहूंगी बजा के ढोल गिरधर मेरा है
रोज खिलावागे वे शामा मखना वाले पेडे लैके नाल तू राधा ने कदे आजा साडे वेडे
कैसी रचना रची गया तू जिधर देखूं वहां तू ही तू
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम राम नारायणम जानकी वल्लम
पीला दे वे श्यामा अपने नाम दी मस्ती,
मेरा श्याम अपने दर पर आंखों से मह पिलाएं
मेरा दिल चुरा के ले गया इक गवाला गोकुल शहर दा
कान्हा मेरी सांसो पे नाम अपना लिखा लेना
बिहारी तेरी यारी पे बलिहारी रे बलिहारी
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार प्यारे जू
पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे
कोई कहे गोविंदा, कोई कहे गोपाला। मैं तो बोलु सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ऐकली खड़ी रे मीरा बाई एक्ली खड़ी ओ हो मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही
bottom of page